बेबीकाॅर्न है चारा तथा आय का स्रोत

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लेखक

  • राकेश कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-1132001
  • हरदेव राम भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-1132001
  • संदीप कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-1132001
  • बिरेन्द्र कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-1132001
  • ब्रजेश कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-1132001

सार

बीसवीं पशुगणना के अनुसार भारत में विश्व की सर्वाधिक पशुधन आबादी 535.78 मिलियन है। विश्व के कुल पशुधन का यह लगभग 10.71 प्रतिशत है। पिछली पशुगणना की तुलना में यह 4.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। पशुपालन क्षेत्रा लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करने के साथ-साथ दूध, मांस, ऊन, चमड़ा, जीवांश खाद, परिवहन, ऊर्जा संसाध्न आदि उपलब्ध करवाकर अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। हरा चारा, पशुओं के आहार के लिए सबसे सस्ता स्रोत है जो कम लागत में पशुपालकों को अधिक आय दिलवाने में सहायक है। पशुधन क्षेत्रा के सतत् विकास के लिए नियमित रूप से पर्याप्त और पौष्टिक चारे की आपूर्ति अति आवश्यक है। वर्तमान समय में देश में 35.6 प्रतिशत हरे चारे और 10.95 प्रतिशत शुष्क
चारे की कमी दर्ज की गई है, जो पशुधन के स्वास्थ्य और उत्पादकता को प्रभावित करने में सहायक है। लगातार बढ़ती जनसंख्या की खाद्यान्न आपूर्ति के लिए खाद्य पफसलों का क्षेत्रापफल बढ़ने, शहरीकरण एवं औद्योगीकरण के कारण चारे वाली पफसलों के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रापफल निरन्तर कम अथवा स्थिर हो गया है। बढ़ती जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए खाद्य पफसलों का क्षेत्रापफल घटाकर चारा पफसलों को बढ़ावा देना संभव नहीं है तथा इस स्थिति में किसान द्वारा दोहरे उद्देश्य वाली पफसल जैसे-बेबीकाॅर्न की खेती कर अन्य
जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। 

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प्रकाशित

2023-05-12