दुधारू पशुओं के लिए हरे चारे की खेती
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उत्तम एवं दुधारू पशुधन की, विशेषकर, हरियाणा नस्ल की गाय व मुर्रा भैंस दूध के लिए पाली जाती है। इन दोनों दुधारू नस्लों के पशुओं के लिए अच्छा व पौष्टिक हरा चारा वर्षभर उपलब्ध नहीं होता है। इसलिये इनका उत्पादन दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा है। इन्हें हरे चारे के रूप में गन्ना का अगोला खिलाया जाता है। यह पौष्टिकता की दृष्टि से कापफी निम्न कोटि में आता है। उन्नत तकनीक से हरे चारे वाली फसलों की काश्त पर अधिक बल देना चाहिए। इसके साथ-साथ इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि कुल काश्त भूमि के 10 प्रतिशत क्षेत्रा पर पशुओं के लिए अलग से पौष्टिक चारे को उगाने की योजना अवश्य बनायें। ऐसा फसलचक्र अपनायें, जिससे खाद्यान्न उत्पादन के साथ-साथ पशुओं को पौष्टिक चारा भी वर्षभर उपलब्ध हो सके।
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