प्राकृतिक शत्रुओं द्वारा कीट रोकथाम
112 / 80सार
कीटों के प्रबंधन के र्कइ तरीके है उन्हीं में से एक प्राकृतिक शत्राुओं का संरक्षण है। इसके लिये किसानों को कोई अतिरिक्त राशि भी खर्च नहीं करनी पड़ती। इसके लिये उन कृषि कार्य प्रणालियों को अपनाया जाता है, जो कीटों के प्राकृतिक शत्राुओं की लंबी उम्र और प्रजनन या किसी क्षेत्रा के आकर्षण को बढ़ाने में सहायक हों। प्राकृतिक शत्राुओं की निष्क्रिय अवस्था का संरक्षण, फसल विविधता में वृद्धि, चींटी नियंत्राण, कीटनाशकों के उचित उपयोग आदि द्वारा स्वतः कीटनाशकों की आवश्यकता कम हो जाती है और यह टिकाऊ कृषि में सहायक भी है।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-sa4.footer##खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।