प्राकृतिक शत्रुओं द्वारा कीट रोकथाम

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लेखक

  • मो. मोनोब्रुल्लाह भाकृअनपु का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना (बिहार)
  • अंजनी कुमार भाकृअनपु -अटारी, पटना (बिहार)
  • केशव भाकृअनुप, केएबी-1, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • सुदीपा कुमारी झा भाकृअनुप-अटारी, पटना (बिहार)
  • चुन्नी कुमारी आईजीकेवी, रायपुर (झारखंड)

सार

कीटों के प्रबंधन के र्कइ तरीके है उन्हीं में से एक प्राकृतिक शत्राुओं का संरक्षण है। इसके लिये किसानों को कोई अतिरिक्त राशि भी खर्च नहीं करनी पड़ती। इसके लिये उन कृषि कार्य प्रणालियों को अपनाया जाता है, जो कीटों के प्राकृतिक शत्राुओं की लंबी उम्र और प्रजनन या किसी क्षेत्रा के आकर्षण को बढ़ाने में सहायक हों। प्राकृतिक शत्राुओं की निष्क्रिय अवस्था का संरक्षण, फसल विविधता में वृद्धि, चींटी नियंत्राण, कीटनाशकों के उचित उपयोग आदि द्वारा स्वतः कीटनाशकों की आवश्यकता कम हो जाती है और यह टिकाऊ कृषि में सहायक भी है।

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प्रकाशित

2023-07-04