सूखाग्रस्त क्षेत्रों में खेती

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लेखक

  • ललिता भायल ज.ने.कृवि.वि., कृषि महाविद्यालय, जबलपुर-482004 (मध्य प्रदेश)
  • आकाश ज.ने.कृवि.वि., कृषि महाविद्यालय, जबलपुर-482004 (मध्य प्रदेश)
  • दिव्या भायल ज.ने.कृवि.वि., कृषि महाविद्यालय, जबलपुर-482004 (मध्य प्रदेश)
  • राजेश सिंह चैहान आर.एस.एम. ;पी.जी.द्ध काॅलेज, धामपुर-246761, बिजनौर (उत्तर प्रदेश)
  • हिमांशु रंजन आर.एस.एम. ;पी.जी.द्ध काॅलेज, धामपुर-246761, बिजनौर (उत्तर प्रदेश)

सार

जब किसी क्षेत्रा विशेष में होने वाली वर्षा की कुल मात्रा उस स्थान पर होने वाले वाष्पीकरण से कम होती है, तो इस स्थिति को सूखा तथा ऐसे स्थानों को सूखाग्रस्त क्षेत्रा कहते हैं। भारत का 68 फीसदी क्षेत्रा सूखे की चपेट में है। जनसंख्या वृद्धि की दर को देखते हुए इन सूखाग्रस्त क्षेत्रों का प्रभावी उपयोग करना बहुत जरूरी है, किन्तु ‘बिन पानी सब सून’, सच है। बिना जल के बड़े पैमाने पर खेती कर पाना असंभव है। अतः वर्षा जल के संचयन, संरक्षण और दक्षतापूर्ण उपयोग से ही खेती संभव है, जिसे उचित भूपरिष्करण, मल्चिंग, कम अवधि वाली किस्मों आदि तकनीकियों द्वारा संभव किया जा सकता है।

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प्रकाशित

2023-07-04