मक्का के रोगों का नियंत्रण

98 / 67

लेखक

  • गौरव कुमार यादव भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • अजय कुमार मिश्रा भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • अभिषेक कुमार सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ-250110 (उत्तर प्रदेश)
  • प्रियंका यादव सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ-250110 (उत्तर प्रदेश)
  • अनुपम कुमार सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ-250110 (उत्तर प्रदेश)

सार

मक्का, चावल और गेहूं के बाद तीसरी सबसे महत्वपूर्ण अनाज की फसल है। इसकी उत्पादन क्षमता अन्य खाद्य फसलों से अधिक होने के कारण इसको विश्व की खाद्य फसलों की रानी कहा जाता है। इसकी खेती सभी प्रकार की जलवायु में की जाती है। इसे भारत में लगभग 10 मिलियन हैक्टर क्षेत्रा और 28.72 मिलियन टन के वार्षिक उत्पादन के साथ प्रमुख स्थान प्राप्त है। विश्वस्तर पर मक्का में विभिन्न रोगों के कारण लगभग 9 प्रतिशत उपज के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इनमें से अधिकांश रोगजनक जीवाणु और पफपूंफद मूल के हैं। भारत में इन रोगों से मक्का में लगभग 13.2 प्रतिशत का नुकसान होता है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2023-07-04