खरीफ फसलों के खरपतवारों का प्रबंधन

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लेखक

  • शिवानी रंजन डा. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय, पूसा-848125 (बिहार)
  • डी.के. राॅय डा. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय, पूसा-848125 (बिहार)
  • विश्वजीत प्रामाणिक डा. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय, पूसा-848125 (बिहार)
  • सुमित सौ डा. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय, पूसा-848125 (बिहार)

सार

उष्ण कटिबंधीय कृषि में खरपतवार सबसे कम आंकने वाले फसल के शत्राु हैं। ये अन्य कीटों और रोगों की तुलना में फसल की पैदावार में अधिक कमी लाते हैं। भारत में विभिन्न पीड़कों से कृषि उपज की कुल वार्षिक हानि में, खरपतवारों का लगभग 37 प्रतिशत, कीटों का 29 प्रतिशत, रोगों का 22 प्रतिशत और अन्य पीड़कों का 12 प्रतिशत हिस्सा है। खरपतवार उत्पाद, फाइबर, तेल, चारा, पशु उत्पादों (मांस और दूध) की मात्रा और गुणवत्ता को कम करते हैं। इसके अलावा मनुष्य एवं पशुओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करते है। कई खरपतवार नियंत्राण विधियों-मैन्युअल, मकेनिकल , जैविक आरै रासायनिक का उपयोग किया जाता है। लगभग इन सभी विधियों की अंतर्निहित सीमाएं हैं।

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प्रकाशित

2023-07-04