गेहूं की उन्नत प्रजातियों से अधिक लाभ

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लेखक

  • उमा साह भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
  • रेखा रानी भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
  • विक्रांत सिंह भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
  • जितेन्द्र ओझा भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
  • शांतनु कुमार दुबे भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कानपुर (उत्तर प्रदेश)

सार

गेहूं, विश्व की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में से एक है। इसे विश्व के लगभग सभी भागों में विभिन्न कृषि परिस्थितियों में उगाया जाता है। महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत के लिए, विश्व की लगभग आधी से अधिक जनसंख्या गेहूं पर निर्भर है। भारत में उगाये जाने वाली खाद्यान्न फसलों में यह दूसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल है, जो देश के खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में अतुलनीय योगदान देती है। गेहूं सामान्यतः प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन ‘बी’ एवं पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत है। गेहूं में लगभग 10.3 ग्राम प्रोटीन (ग्लूटन), 49 मि.ग्रा. कैल्शियम तथा 1.5 मि.ग्रा. आयरन प्रति 100 ग्राम की दर से उपस्थित होता है। भारत में गेहूं मुख्य अनाज वाली फसल के रूप में रबी ऋतु में उगाई जाती है।

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प्रकाशित

2023-07-04