अभ्रक अपशिष्ट हैं पोटाश उर्वरक के विकल्प

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लेखक

  • भेरू लाल कुम्हार कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर (राजस्थान)
  • मोती लाल मेहरिया कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर (राजस्थान)
  • मूला राम कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर (राजस्थान)
  • रमेती जांगिड़ कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर (राजस्थान)
  • विक्रम मीणा कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर (राजस्थान)

सार

अभ्रक अयस्क की सफाई और प्रसंस्करण के बाद उत्पन्न अभ्रक कचरे में लगभग 8-10 प्रतिशत पोटेशियम होता है। महंगे पोटाश उर्वरकों के विकल्प के रूप में इसकी क्षमता का वर्तमान में दोहन किया जा रहा है, विशेष रूप से भारत में, जहां पोटेशियम उर्वरकों की पूरी मांग आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। अभ्रक अपशिष्ट का रासायनिक और जैविक साधनों द्वारा प्रसंस्करण कर एक कृषि संसाधन तैयार किया जा सकता है। कृषि में उर्वरकों का उपयोग अपरिहार्य है। इसकी उपलब्धता, सुलभ और किफायती होनी चाहिए। जब उर्वरकों की लागत को ध्यान में रखा जाता है, तो व्यावसायिक पोटाश उर्वरक जैसे-म्यूरेट ऑफ पोटाश (KC1) या सल्पेफट ऑफ पोटाश (K2SO4) सबसे महंगे उर्वरकों में से हैं। इसका कारण यह है कि भारत में पोटेशियम उर्वरक बनाने के लिये उच्च श्रेणी के पोटेशियमयुक्त खनिजों के कोई भंडार नहीं हैं। इसलिए पोटेशियम उर्वरकों को आयात किया जाता है।

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प्रकाशित

2023-07-04