गेहूं की कटाई में धूल कणों से सुरक्षा
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हाल के दशकों में बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादन में तेजी से यंत्राीकरण हुआ है। उदाहरण के लिए कृषि रोपण, कटाई, उत्पादन के बाद प्रसंस्करण और यहां तक कि पशुपालन भी यंत्राीकृत हो रहा है। इन तकनीकी विकासों से क्षमता और गुणवत्ता में वृद्धि हुई है। इन्होंने कृषि कार्यों में प्रदूषण को भी एक गंभीर स्तर तक बढ़ा दिया है। कृषि कार्य में धूल के संपर्क को 16वीं शताब्दी में श्वांस रोग के मुख्य कारण के रूप में दर्शाया गया था। यह कृषि श्रमिकों के बीच श्वांस समस्याओं का एक प्रमुख स्रोत बना है। कृषि कार्य में मशीनों, फसल एवं मृदा के बीच परस्पर क्रिया होती है। इसके कारण खेत में कृषि मशीनों के संचालन से बहुत धूल उत्पन्न हो जाती है। सामान्य तौर से सांस लेने के दौरान खेतिहर श्रमिक इन धूल के कणों को सांस के साथ श्वांस तंत्रा में अंदर ले लेते हैं। कृषि कार्यों में ऊर्जा की आवश्यकता अधिक होने के कारण सांस लेने की प्रक्रिया तेज होती है। इसके कारण धूल की मात्रा श्वंास तंत्रा में अधिक हो जाती है, जिससे स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
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