कृषि में ड्रोन का बढ़ता उपयोग
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हरित क्रांति ने भारतीय कृषि को निश्चित रूप से खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्रदान की है। पिछले कुछ वर्षों में देश के किसानों ने नई तकनीकियों को बड़े ही सराहनीय तरीके से अपनाया है। इसमें किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विगत वर्षों में वैज्ञानिकों द्वारा किये गए अनुसंधान कार्यों से विकसित नई तकनीकियों को किसानों ने अपने खेतों में जिस तरह से अपनाया है, यह कार्य अत्यंत ही सराहनीय है। उन्नत बीजों, मृदा जांच पर आधारित उर्वरकों के प्रयोग, संरक्षित कृषि, रसायनों का उचित उपयोग और कृषि यंत्रा ड्रोन, ए.आई. इत्यादि का प्रयोग इनमें शामिल है। उनका ही यह परिणाम है कि हमारा देश आज अनाज उत्पादन के क्षेत्रा में आत्मनिर्भर है। यह किसानों और वैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयासों की ही देन है कि हम तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या को पर्याप्त एवं संतुलित मात्रा में भोजन उपलब्ध करवाने में सक्षम हो सके हैं।
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