पूसा मिनी कृषि प्राइम मूवर
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भारतीय कृषि में विभिन्न कार्यों को करने के लिए मानव शक्ति की आवश्यकता पड़ती है। मानव शक्ति का प्रयोग तब से हो रहा है, जब से कृषि शुरू हुई है। खेती के कार्य में मानव बल को कम करने और इनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों तथा कृषि यंत्रा निर्माताओं द्वारा विभिन्न प्रकार के यंत्रों व मशीनों का विकास किया गया है। विकसित कृषि औजार, यंत्रा व मशीन, शक्ति साधनों के अनुसार बनाए गए हैं। अभी तक कृषि में प्रयुक्त शक्ति साधनों में प्रमुख रूप से मानव, पशु, ट्रैक्टर, पाॅवर टिलर, डीजल इंजन, कम्बाइन हार्वेस्टर और बिजली चालित मोटर शामिल हैं। बहुमुखी रूप (चल व अचल कृषि कार्यों में) से प्रयोग होने वाले शक्ति साधनों में मानव, पशु, ट्रैक्टर एवं पाॅवर टिलर ही प्रमुख हैं। कृषि में प्रयुक्त शक्ति साधनों की उपलब्धता के बारे में जानकारी सारणी-1 में दी जा रही है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार ट्रैक्टर का उपयोग कृषि कार्यों और ढुलाई में औसतन प्रतिवर्ष 500 से 600 घंटे हो पाता है, जबकि आर्थिक रूप से ट्रैक्टर का उपयोग 1000 घंटा होना चाहिए।
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