आधुनिक कृषि में जैव प्रेरक की भूमिका
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भारत में हरित क्रांति की सफलता के प्रमुख कारक कीटनाशक और उर्वरक के साथ पौधों के विकास में सहयोग करने वाले हार्मोन एवं मशीनीकरण हैं। वर्तमान में हमारी प्राथमिकताएं खाद्य-सुरक्षा से पोषण सुरक्षा पर स्थानांतरित हो गयी हैं। हाल के कुछ वर्षों में अपंजीकृत कीटनाशकों, अन्य रासायनिक पदार्थों,उर्वरकों इत्यादि के अधिक प्रयोग से पारिस्थितिक संतुलन में काफी अस्थिरता आयी है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए कई वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल, अकार्बनिक यौगिकों का कम प्रयोग, वनीकरण को बढ़ावा देना और लोगों में कार्बनिक खेती के प्रति जागरूकता फैलाना आवश्यक हो गया है। इस कारण वर्तमान समय में फसलों पर जैव प्रेरक के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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