महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा उद्यमिता विकास
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‘प्रणालीगत डिजाइन’ नवाचार का प्रयोग सीमांत महिला समुदाय को प्रभावी व आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए किया गया है। इसमें आसपास के क्षेत्रों में पाये जाने वाले कच्चे माल से उपयोगी उत्पादों के निर्माण से इन्हें आजीविका प्रदान की गयी। इस प्रक्रिया में उनकी कला को परखकर व उन्हें और उन्नत बनाने हेतु दो प्रायोगिक केस स्टडीज का इस्तेमाल किया गया। स्थानीय रूप से उपलब्ध मृदा और चिकन कढ़ाई (कपड़े पर धागे द्वारा रूपांकनों के निर्माण करने की एक पारंपरिक कला) लखनऊ की जीआई टैग प्राप्त है तथा कुछ अन्य सहायक सामग्रियों की पहचान की गयी। इस प्रकार निपुणता की पहचान कर समाज के शैक्षिक, सरकारी, गैर-सरकारी, वित्तीय व व्यावसायिक संस्थाओं को एकत्रित करके एक प्रणालीगत तरीके से महिलाओं का सशक्तिकरण किया गया।
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