गन्ने में अंतःफसलीकरण से खरपतवार प्रबंधन

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लेखक

  • बाल कृष्ण लवली प्रोपेफशनल विश्वविद्यालय, जालंधर-दिल्ली ग्रैंड ट्रंक रोड, पफगवाड़ा-144001 (पंजाब)
  • राकेश कुमार भाकृअनुप का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना-800014 (बिहार)
  • आशुतोष कुमार लवली प्रोपेफशनल विश्वविद्यालय, जालंधर-दिल्ली ग्रैंड ट्रंक रोड, पफगवाड़ा-144001 (पंजाब)
  • हंसराज हंस भाकृअनुप का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना-800014 (बिहार)
  • धर्म नाथ कामत डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर-848125 (बिहार)

सार

गन्ना, भारत की एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसल है। यह विश्व स्तर पर चीनी (80 प्रतिशत) का मुख्य स्रोत है। यह नकदी फसल के रूप में एक प्रमुख स्थान बनाए हुए है। गन्ना एक लंबी अवधि की फसल है। अन्य पफसलों के साथ गन्ने की अंतःफसलीकरण खेती बिना क्षेत्रा को बढ़ाए, आय और रोजगार तथा सृजन प्रदान करती है। खरपतवार की समस्याओं पर काबू पाने के लिये अंतःफसलीकरण प्रणाली में खरपतवार प्रबंधन हमेशा एक मुद्दा रहा है। उच्च उत्पादकता स्तर प्राप्त करने के लिये मुख्य आधार और घटक फसलों को नियमित अंतराल पर खरपतवारमुक्त वातावरण प्रदान करने के लिये नियंतर प्रयासों की आवश्यकता होती है। गन्ने की उच्च उत्पादकता प्राप्त करने के लिए इसके खेतों में खरपतवारों का समय रहते प्रबंध्न अत्यंत आवश्यक है। खरपतवार नियंत्राण न करने की स्थिति में गन्ना उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा इससे किसानों को अपेक्षित मुनाफा भी नहीं मिल पाता है।

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प्रकाशित

2023-08-10