सतत उत्पादन प्रणालियों के लिए जलवायु स्मार्ट कृषि

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लेखक

  • मोहम्मद हसनैन भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, समस्तीपुर-848125
  • राजीव कुमार सिंह भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • विनोद कुमार सिंह भाकृअनुप-केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, संतोषनगर, हैदराबाद-500059
  • प्रवीण कुमार उपाध्याय भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • सत्यम रावत भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012

सार

जलवायु परिवर्तन, बढ़ती जनसंख्या, मृदा क्षरण और जैव विविधता नुकसान सहित प्राकृतिक संसाधनों की हानि जैसी वैश्विक पर्यावरणीय समस्याओं के युग में सतत खाद्य उत्पादन करना इक्कीसवीं सदी की प्रमुख चुनौती है। जलवायु परिवर्तन, कृषि प्रणालियों के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है। हरित क्रांति ने, यद्यपि कृषि उत्पादन को कई गुना बढ़ा दिया, लेकिन जलवायु परिवर्तन सहित, पर्यावरण संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हुई हैं। जलवायु स्मार्ट कृषि को उत्पादकता और आय में निरंतर बृद्धि, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूल एवं लचीला बनाने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। जलवायु स्मार्ट कृषि, जलवायु परिवर्तन के तहत खाद्य संरक्षण के लिए स्थायी कृषि विकास के लिए पर्यावरण पर तकनीकी, नीति और निवेश बढ़ाने का एक दृष्टिकोण है। इसके उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कई रणनीतियों जैसे कि खेती के लिए पवन चक्कियों, सौर पैनलों, जैव ऊर्जा संचालित जल पंपों तथा जीरो टिलेज संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकियों को अपनाया जा सकता है। जलवायु हानि के खतरों को कम करने के लिए मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां बहुत मददगार होंगी। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) प्रशासकों और शोधकर्ताओं को आकस्मिक कार्यक्रमों की योजना बनाने में कुशलतापूर्वक मदद कर सकती है। यह लेख टिकाऊ खाद्य उत्पादन के लिए जलवायु-स्मार्ट दृष्टिकोण के रूप में पारंपरिक कृषि को अपनाए जाने की संस्तुति करता है। इसके अलावा जलवायु
परिवर्तन एवं कृषि के बीच पारस्परिक संबंध पर भी विमर्श करता है।

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प्रकाशित

2024-03-28