टिकाऊ खाद्य उत्पादन के लिए संरक्षण कृषि
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संसाधनों की मात्रा और गुणवत्ता में कमी के कारण आज विश्व के कई देश संरक्षण खेती को बड़े व्यापक स्तर पर अपना रहे हैं। वर्तमान में विश्व में लगभग 205.4 मिलियन हैक्टर क्षेत्रा पर संरक्षण खेती की जा रही है। संरक्षण खेती करने वाले देशों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील और अर्जेन्टिना प्रमुख हैं। इस विधि का मुख्य उद्देश्य खेत की मिट्टी की न्यूनतम जुताई करने पर आधारित है। मृदा सतह को पफसल अवशेषों या दूसरे किसी वनस्पति आवरणों से ढककर रखा जाए तथा पफसलचक्र पद्धति को अपनाया जाये। इससे पफसलों की पैदावार बढ़ने के साथ-साथ संसाधनों जैसे मृदा, पानी, पोषक तत्वों एवं ऊर्जा का संरक्षण, पफसल उत्पाद और वातावरण की गुणवत्ता में बृद्धि होती है। यह कृषि में टिकाऊपन लाने के लिए बहुत जरूरी है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भविष्य में इसी तरह की खेती को ही अपनाना होगा, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अच्छे से जीवन निर्वाह कर सकें। अतः किसान इस वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी को अपनाकर अधिक फसल उत्पादन के साथ-साथ ज्यादा लाभ अर्जित कर सकते हैं।
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