कृषि में सतत जल प्रबंधन
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दुनियाभर में सतत कृषि विकास के लिए जल सबसे महत्वपूर्ण संसाधन माना जाता है। बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन और अन्य क्षेत्रों में बढ़ती मांग के कारण जल की कमी मनुष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही है। ये विधियां दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती हैं। कृषि में सतत जल प्रबंधन की बहु-कार्यात्मक भूमिका है
जैसे-सिंचाई अनुप्रयोग, मृदा और पौधों के तरीकों, जल मूल्य निर्धारण, उपचारित अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग, जल प्रबंधन और क्षमता निर्माण में किसानों की भागीदारी में सुधार
को इस प्रकार के बेहतर प्रबंधन को कम जल के साथ अधिक हासिल किया जा सकता है। वर्तमान लेख कम सिंचाई दक्षता और जल की समस्या का समाधान, जल उत्पादकता
और साथ ही फसल प्रणालियों की उत्पादकता में बृद्धि करता है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के परिदृश्य कृषि में सतत जल प्रबंधन पर विचार व्यक्त करता है।
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