गन्ने की नवीन बीज गुणन विधियां

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लेखक

  • मोना नगरगडे भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • विशाल त्यागी भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • प्रीति सिंह भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • संतोष कुमार भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • राजीव कुमार सिंह भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012

सार

गन्ना एक बहुमुखी फसल है। इसका उपयोग मुख्य रूप से चीनी उत्पादन के लिए किया जाता है। इसके अलावा इथेनाॅल उत्पादन में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। किसी भी फसल के लिए गुणवत्तायुक्त बीज, उत्पादन एवं उपलब्धता फसल की नींव होती है। गुणवत्तायुक्त बीज गुणवत्ता सामान्यतः फसल उत्पादन में 10-20 प्रतिशत की बृद्धि करता है। इसके अलावा अन्य अवयवों जैसे-खाद, उर्वरक, पानी, भूमि, श्रम आदि की क्रियाशीलता को बढ़ाता है। देश में गन्ने की बुआई या बीज उत्पादन सामान्यतः दो कली एवं तीन कली विधि से की जाती है। इन विधियों से बुआई करने पर बीज गुणन अनुपात लगभग 1ः10 होता है, जो बहुत कम होता है। इस कारण बुआई के लिए अधिक बीजों की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही साथ लागत, परिवहन, विनिमय और प्रतिस्थापन की भी समस्या होती है। नई किस्मों के तेजी से गुणन के लिए बीज उत्पादन की नई तकनीकों जैसे-बड चिप, केन नोड, टिशू कल्चर आदि की आवश्यकता है। इस प्रकार बीज उत्पादन की नवीन गुणन विधियों को अपनाकर गन्ने की खेती की समग्र उत्पादकता और स्थिरता में उल्लेखनीय बृद्धि की जा सकती है।

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प्रकाशित

2024-03-28