बागवानी आधारित समन्वित कृषि प्रणाली
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हरित क्रांति की शुरूआत से लेकर अब तक हमने संसाधनों के अभाव में एकल फसल प्रणाली पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित किया है। यही कारण है कि धान तथा गेहूं की फसलों को ही समर्थन मूल्य प्राप्त होने के कारण किसान लगातार एक ही तरह के फसलोत्पादन में लगे हुए हैं। बढ़ती आबादी की जरूरतें जैसे-धान्य के साथ-साथ दाल, तिलहन, सब्जियां, पफल-फूल, दुग्ध, मछली एवं अण्डे आदि की भरपाई तथा वर्षभर रोजगार की पूर्ति एकल फसल प्रणाली से नहीं की जा सकती। वर्तमान में यह आवश्यक हो गया है कि कृषि में फसल के साथ-साथ अन्य घटकों को भी सम्मिलित किया जाए। इससे किसान को सतत आय मिलने के साथ ही कृषि के विभिन्न घटकों के अवशेषों का भी संसाधनों के रूप में पुनर्चक्रण किया जा सकेगा, जो पर्यावरण की दृष्टि से भी लाभकारी सिद्ध होगा।
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