बागवानी आधारित समन्वित कृषि प्रणाली

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लेखक

  • राजीव कुमार सिंह भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • एस.एस. राठौर भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • प्रवीण कुमार उपाध्याय भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • कपिला शेखावत भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012
  • विशाल त्यागी भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012

सार

हरित क्रांति की शुरूआत से लेकर अब तक हमने संसाधनों के अभाव में एकल फसल प्रणाली पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित किया है। यही कारण है कि धान तथा गेहूं की फसलों को ही समर्थन मूल्य प्राप्त होने के कारण किसान लगातार एक ही तरह के फसलोत्पादन में लगे हुए हैं। बढ़ती आबादी की जरूरतें जैसे-धान्य के साथ-साथ दाल, तिलहन, सब्जियां, पफल-फूल, दुग्ध, मछली एवं अण्डे आदि की भरपाई तथा वर्षभर रोजगार की पूर्ति एकल फसल प्रणाली से नहीं की जा सकती। वर्तमान में यह आवश्यक हो गया है कि कृषि में फसल के साथ-साथ अन्य घटकों को भी सम्मिलित किया जाए। इससे किसान को सतत आय मिलने के साथ ही कृषि के विभिन्न घटकों के अवशेषों का भी संसाधनों के रूप में पुनर्चक्रण किया जा सकेगा, जो पर्यावरण की दृष्टि से भी लाभकारी सिद्ध होगा।

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प्रकाशित

2024-03-28