दिसंबर के मुख्य कृषि कार्य

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लेखक

  • राजीव कुमार सिंह भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • कपिला शेखावत भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • प्रवीण कुमार उपाध्याय भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • एस.एस. राठौर भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012
  • संदीप कुमार सिंह भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012

सार

आगामी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुये कृषि उत्पादन को और अधिक गुणवत्ता के साथ बढ़ाने की आवश्यकता है। रबी फसलें जैसे-चना, मटर, मसूर, सरसों, गेहूं, आलू और अन्य सब्जीवर्गीय फसलें खेतों में खड़ी हैं। इनकी अच्छी पैदावार लेने के लिये किसानों को मौसम के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है। इसमें उन्हें पाला, कोहरा के साथ-साथ कुछ रोग, कीट और व्याधियों का प्रकोप तथा अचानक बढ़ने वाले वातावरण के तापमान से अपनी फसलों की सुरक्षा करनी आवश्यक है। खेत में पर्याप्त नमी होने पर फसल बढ़वार के साथ-साथ पौधों में पाले से बचने की क्षमता भी बढ़ जाती है। टमाटर आदि सब्जियों का प्रसंस्करण करके मूल्यवर्धन द्वारा अधिक आय सम्भव है। इससे कृषक स्वरोजगार सृजन करके कृषि उद्यमी भी बना सकते हैं। दिसंबर में अधिकतर फसलें अपनी क्रांतिक बढ़वार की अवस्था में होती हैं। समय पर बोया गया गेहूं इस माह में क्रांतिक चंदेरी जड़ अवस्था में होता है, जिस कारण सिंचाई के लिए प्रबंधन बेहद आवश्यक हो जाता है। सिंचाई प्रबंधन के साथ-साथ पोषक तत्वों पर भी विशेषरूप से ध्यान देने की जरूरत है। दिसंबर के अंत तक तोरिया की पफसल भी पककर तैयार हो जाती है। तोरिया की कटाई के उपरान्त दूसरी पफसल की बुआई में देरी नहीं करनी चाहिए। चारे वाली पफसलें जैसे-बरसीम, जई और रिजका कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं। इसी प्रकार इस माह के जरूरी कृषि कार्यलापों का वर्णन प्रस्तुत आलेख में किया जा रहा है। 

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प्रकाशित

2024-03-28