कुट्टू की खेती

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लेखक

  • दुर्गा प्रसाद भंडारी कृषि विज्ञान केंद्र, किन्नौर-172107 (हिमाचल प्रदेश)
  • अशोक कुमार ठाकुर कृषि विज्ञान केंद्र, किन्नौर-172107 (हिमाचल प्रदेश)
  • इंद्र देव कृषि विज्ञान केंद्र, किन्नौर-172107 (हिमाचल प्रदेश)
  • अरुण नेगी कृषि विज्ञान केंद्र, किन्नौर-172107 (हिमाचल प्रदेश)
  • बुट्ठी राम कृषि विज्ञान केंद्र, किन्नौर-172107 (हिमाचल प्रदेश)

सार

कुट्टू, एक बहुद्देशीय पफसल है। यह व्यापक रूप से हिमालयी क्षेत्रों में उच्च ऊंचाई पर उगाई जाती है। इसकी 20 प्रजातियों में से भारत में केवल दो प्रजातियों पफैगोपाइरम टैटरिकम और फैगोपाइरम एस्कुलेंटम की खेती की जाती है। कुट्टू में उच्च मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तथा कई औषधीय गुण होते हैं। रूटीन के शारीरिक और जैविक गुणों में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइन्फ्रलेमेशन, एंटी-हाइपरटेंशन आदि शामिल हैं। इसकी उगाई जाने वाली अधिकांश किस्मे किसानों का अपना चयन हैं। मुख्य रूप से बदलते फसलचक्र, खानपान की आदतों में
बदलाव और कम उत्पादकता के कारण कुट्टू का क्षेत्रा दिन-प्रतिदिन घट रहा है। फास्टपफूड, औषधीय और जलपान के रूप में इसकी क्षमता के दोहन से मूल्यवर्धन, जमीनी स्तर पर इससे बने आहार और औषधीय मूल्यों के बारे में जागरूकता कुट्टू की खेती के विस्तार के लिए कुछ नए प्रमुख क्षेत्रा हो सकते हैं।

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प्रकाशित

2024-04-02