संरक्षण खेती से बढ़ाएं संसाधन उपयोग दक्षता

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लेखक

  • अश्विन कुमार मीना कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221005 (उत्तर प्रदेश)
  • कमलेश मीना कृषि विज्ञान केन्द्र (भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुशंधान संस्थान), मल्हना, दवे रिया-274506 (उत्तर प्रदेश)

सार

देश की बढ़ती आबादी के लिए खाद्यान्न आपूर्ति हेतु प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक एवं असंतुलित मात्रा में दोहन किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप वर्तमान में प्राकृतिक संसाधनों की गुणवत्ता और मात्रा पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से वायु, जल और मृदा प्रदूषण में लगातार वृद्धि हो रही है और मानव स्वास्थ्य पर इसका हानिकारक प्रभाव पड़ रहा है। इसके साथ ही खेती में बढ़ती उत्पादन लागत और किसानों की घटती आय चिंता का विषय बनी हुई है। भविष्य में खाद्यान्न आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन उपयोग दक्षता बढ़ाने हेतु मृदा और जल जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों का विवेकपूर्ण ढंग से उपयोग करना आवश्यक है। इससे जलवायु परिवर्तन, भुखमरी और कुपोषण जैसी गम्भीर समस्याओं से निजात मिल सकेगी। ऐसे में संरक्षण खेती का नाम उभरकर हमारे सामने आता है।

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प्रकाशित

2024-04-02