मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन
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वर्तमान समय में विश्वस्तर पर, कृषि पारिस्थितिक तंत्रा एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या से जूझ रहा है। यह मानव समाज के लिए खाद्य सुरक्षा प्राप्ति हेतु एक बड़ी चुनौती है। विश्व की जनसंख्या 1.3 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही है, जबकि प्रति व्यक्ति प्रभावी खेती योग्य भूमि 0.55 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से घट रही है। लगातार बढ़ती आबादी के आहार के लिए पफसल भूमि के क्षैतिज विस्तार की न्यूनतम गुंजाइश है। दुनियाभर में, मृदा स्वास्थ्य और इसका स्थायी प्रबंधन वर्तमान परिदृश्य में चिंता के प्रमुख विषय हैं। मानव गतिविधियां बड़े पैमाने पर मृदा क्षरण में योगदान करती हैं। इसमें वनों की कटाई, खनन, अत्यधिक जुताई, भारी मशीनरी का उपयोग, उर्वरकों व कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग, अप्रभावी सिंचाई प्रबंधन व अपर्याप्त पफसल अवशेष इत्यादि का उल्लेख किया जा सकता है।
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