कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए जल प्रबंधन

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लेखक

  • अंशु गंगवार कृषि विज्ञान केंद्र, परसौनी, पूर्वी चंपारण-2, डा. रा.प्र.क.कृ.वि.वि., पसू (बिहार)
  • शाश्वत कुमार कर कृषि विज्ञान केंद्र, परसौनी, पूर्वी चंपारण-2, डा. रा.प्र.क.कृ.वि.वि., पसू (बिहार)
  • गौरव सिंह कृषि विज्ञान केंद्र, परसौनी, पूर्वी चंपारण-2, डा. रा.प्र.क.कृ.वि.वि., पसू (बिहार)
  • भास्कर प्रताप सिंह कृषि विज्ञान केंद्र, परसौनी, पूर्वी चंपारण-2, डा. रा.प्र.क.कृ.वि.वि., पसू (बिहार)

सार

खेती के लिए जल अति आवश्यक है। सिंचित कृषि, कुल खेती योग्य भूमि के 20 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती है या दुनियाभर में उत्पादित कुल खाद्य में 40 प्रतिशत का योगदान करती है। भारत में विश्व के मात्रा 4 प्रतिशत जल संसाधन की उपलब्धता है, जबकि वैश्विक आबादी का 16 प्रतिशत हिस्सा यहीं बसता है। देश में 83 प्रतिशत जल का प्रयोग कृषि के लिए होता है। ऐसे में कुशल जल प्रबंधन कर कृषि उत्पादन के साथ-साथ जल की दक्षता को भी बढ़ाया जा सकता है।

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प्रकाशित

2024-04-02