प्राकृतिक खेती

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लेखक

  • मोती लाल मीणा भाकृअनपु -कृषि प्रद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, पटना-801506 (बिहार)
  • मधु सूदन कुण्डु भाकृअनपु -कृषि प्रद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, पटना-801506 (बिहार)
  • अंजनी कुमार भाकृअनपु -कृषि प्रद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, पटना-801506 (बिहार)
  • अमरेन्द्र कुमार भाकृअनपु -कृषि प्रद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, पटना-801506 (बिहार)

सार

प्राकृतिक खेती का मुख्य आधार देसी गाय है। यह कृषि की प्राचीन पद्धति है। यह पद्धति भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखती है। इस पद्धति में रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है। प्रकृति में पाए जाने वाले तत्वों को खेती में कीटनाशक के रूप में काम में लिया जाता है। प्राकृतिक खेती में कीटनाशकों के रूप में गोबर की खाद, कम्पोस्ट, जीवाणु खाद, पफसल अवशेष और प्रकृति में उपलब्ध खनिज जैसे-राॅक पफाॅस्पफेट, जिप्सम आदि द्वारा पौधों को पोषक तत्व दिये जाते हैं।

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प्रकाशित

2024-04-02