सोयाबीन उत्पादन में ऊर्जा खपत

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लेखक

  • पुष्पराज दीवान भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल-462038 (मध्य प्रदेश)
  • हर्षा वाकुडकर भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल-462038 (मध्य प्रदेश)
  • संदीप गांगील भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल-462038 (मध्य प्रदेश)
  • मनीष कुमार भाकृअनुप-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल-462038 (मध्य प्रदेश)

सार

सोयाबीन की खेती पूरे भारत में महत्व रखती है। उत्पादन की दृष्टि से भारत शीर्ष दस सोयाबीन उत्पादक देशों में शामिल है। मध्य प्रदेश जिसे ‘सोया प्रदेश’ कहा जाता है, देश में सोयाबीन का प्रमुख उत्पादक राज्य है। देश के कुल सोयाबीन उत्पादन में मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। इस राज्य के विंध्य पठार क्षेत्रा में सोयाबीन उत्पादन की कृषि ऊर्जा खपत और ऊर्जा उत्पादन का आकलन किया गया। इस तरह का विश्लेषण कृषि के विविध ऊर्जा स्रोतों की खपत की सार्थक तुलना की अनुमति देता है। इससे ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण विश्लेषण सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुशल निर्णय लेने की सुविधा मिलती है। अध्ययन क्षेत्रा में सोयाबीन का उत्पादन 949 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर और अवशेष का उत्पादन 1049 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर पाया गया है। सोयाबीन की खेती के लिए कुल ऊर्जा निवेश 10330 मेगाजूल प्रति हैक्टर पाया गया।

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प्रकाशित

2024-04-02