मछलीपालन में एंटीबायोटिक्स का प्रभाव

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लेखक

  • गुलगुल सिंह गरुु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना (पंजाब)
  • बलबीर सिंह खद्दा गरुु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना (पंजाब)

सार

मानव सभ्यता सीधे तौर पर पर्यावरण में मौजूद एंटीबायोटिक अवशेषों से जुड़ी हुई है। ये अवशेष पर्यावरण में प्राकृतिक रूप से या कृत्रिम रूप से उत्पन्न होते हैं। इनसे बचने और प्रतिकार के लिए इन अवशेषों की वातावरण में भूमिका एवं मिलावट को बेहतर रूप से समझने की आवश्यकता है। जलीय कृषि उद्योग के तेजी से विकास और महत्व को ध्यान में रखते हुए, एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाने की जरूरत है। मछलीपालन करने वाले किसानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मछलियों को स्वास्थ्य और कल्याण की सर्वोत्तम स्थिति में रखा जाए। नई दवाओं के आविष्कार या एंटीबायोटिक के विकल्प के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इस प्रकार बढ़ी हुई जागरूकता, किसानों के जीवन स्तर के उत्थान को सुनिश्चित करके जलीय वातावरण की बेहतरी में मदद कर सकती है।

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प्रकाशित

2024-04-03