पोषण से भरपूर चारा है अजोला

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लेखक

  • एम.बी. रेड्डी भाकृअनपु -भारतीय पशु चिकित्सा अनुशंधान सस्ं थान, इज्जतनगर, बरेली-243122 (उत्तर प्रदेश)
  • अर्चना रानी भाकृअनपु -भारतीय पशु चिकित्सा अनुशंधान सस्ं थान, इज्जतनगर, बरेली-243122 (उत्तर प्रदेश)
  • ए.के. वर्मा भाकृअनपु -भारतीय पशु चिकित्सा अनुशंधान सस्ंथान, इज्जतनगर, बरेली-243122 (उत्तर प्रदेश)
  • राकेश पांडे भाकृअनपु -भारतीय पशु चिकित्सा अनुशंधान सस्ंथान, इज्जतनगर, बरेली-243122 (उत्तर प्रदेश)

सार

भारत में विश्व का 15 प्रतिशत पशुधन उपलब्ध है। ये पशु विश्व के भौगोलिक क्षेत्रापफल का मात्रा 2 प्रतिशत क्षेत्रापफल और 4.90 प्रतिशत कृषित चारा क्षेत्राफल पर निर्भर हैं। वर्ष 2019-20 में कृषि तथा देश की जीडीपी में पशुपालन का क्रमशः 26.00 प्रतिशत तथा 4.11 प्रतिशत योगदान रहा है। पशुपालन से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में 18.80 प्रतिशत रोजगार का सृजन होता है तथा कठिन समय में पशुपालकों का सहारा भी होता है। जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ दूध, दुग्ध उत्पादों तथा मांस की बढ़ती मांग से पशुपालन पर दबाव अत्यधिक बढ़ता जा रहा है। देश में कृषि के अन्तर्गत सकल क्षेत्रापफल के मात्रा 4.9 प्रतिशत क्षेत्रापफल (9.13 मिलियन हैक्टर) में ही चारा उत्पादन किया जाता है। देश में हरे चारे, शुष्क चारे तथा दाना मिश्रण की आवश्यकता तथा उपलब्धता में क्रमशः 25-30 प्रतिशत, 12-14 प्रतिशत तथा 30-35 प्रतिशत की कमी है। अतः पशुओं की अच्छी वृद्धि तथा उत्पादकता को बढ़ाने के लिये वैकल्पिक, किफायती तथा वर्षभर उपलब्धता वाले चारा अनुपूरक स्रोतों को विकसित किया जाना चाहिये। अजोला उत्कृष्ट प्रोटीन से भरपूर चारा है। यह पशुपालन के क्षेत्रा में एक वैकल्पिक चारा स्रोत के रूप में दिन-प्रतिदिन लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। इसमें प्रोटीन, खनिज लवण से भरपूर, कम लिग्निन वाली प्रकृति के पोषक तत्व हैं। यह कम संसाधन वाली परिस्थितियों में पशु आहार के क्षेत्रा में एक टिकाऊ समाधान के रूप में सफल होने की क्षमता रखता है।

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प्रकाशित

2024-04-03