टिकाऊ खेती है आधुनिक समय की मांग

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लेखक

  • मौहम्मद हसनैन डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर (बिहार)
  • श्रीपति द्विवेदी डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर (बिहार)
  • दिग्विजय सिंह डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर (बिहार)
  • फिरोज सैफी डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर (बिहार)
  • राजीव कुमार सिंह डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर (बिहार)

सार

कृषि, भारत की लगभग 58 प्रतिशत जनसंख्या को आजीविका प्रदान करती है तथा देश की खाद्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है। देश के किसान, कृषि वैज्ञानिक शोध् एवं विकसित आधुनिक अनुसंधान और तकनीकी का उपयोग कर उत्पादन में लगातार वृद्धि कर रहे हैं। इसके साथ ही आधुनिक तकनीकी के कुछ दुष्प्रभाव भी उत्पन्न हुए हैं, जैसे कि प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से मृदा व जल का अतिदोहन हुआ है। इस दोहन से कृषि में कई चुनौतियां भी उत्पन्न हुई हैं। इनका समाधन ही टिकाऊ/स्थायी/सतत खेती के रूप में भी उभरकर सामने आया है।

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प्रकाशित

2024-04-03