चरागाह के शत्रु पौधे

147 / 42

लेखक

  • पवन कुमार माहौर भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर
  • तरुण कुमार जैन भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर
  • अरुण कुमार तोमर भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर

सार

बीसवीं सदी के बाद चरागाह के लिए आरक्षित स्थानों पर मानव द्वारा निरंतर अतिक्रमण से इसका क्षेत्राफल कम होता जा रहा है। इसके साथ ही चरागाह के लिए दूसरा महत्वपूर्ण क्षति पहुंचाने वाला कारक आयातित कृषि उत्पादों के साथ आये हुए हानिकारक पौधों के बीज इत्यादि अंश हैं। ये पौधे भारत में पहले नहीं पाए जाते थे। इन हानिकारक पौधों का तीव्र गति से प्रसार हो रहा है तथा ये हमारे चरागाह को क्षति पहुंचा रहे हैं।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2024-04-03