चारा वाटिका

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लेखक

  • सुभाष चंद भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी-284003 (उत्तर प्रदेश)
  • राजीव कुमार अग्रवाल भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी-284003 (उत्तर प्रदेश)
  • अजय कुमार राय भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी-284003 (उत्तर प्रदेश)
  • रत्नाकर सिंह पटेल भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी-284003 (उत्तर प्रदेश)
  • सतेन्द्र कुमार भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी-284003 (उत्तर प्रदेश)

सार

पशुधन पालन, ग्रामीण जीवन और हरित पर्यावरण वायुमंडल के टिकाऊपन के प्रयासों का एक अभिन्न अंग है। बढ़ते शहरीकरण और स्वास्थ्य जागरूकता के साथ, पशु स्रोतों से प्राप्त होने वाले आहार की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस प्रकार चारा उत्पादन कृषि विकास को बढ़ाने, ग्रामीण गरीबी और कुपोषण को कम करने के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। भारत में वर्तमान पशुधन की संख्या 535 मिलियन से ज्यादा है। वर्ष 2021-22 में देश 221.6 मिलियन टन दूध का उत्पादन कर विश्व का अग्रणी देश बना। इस उपलब्धि के बावजूद भी पशुधन उत्पादकता के मामले में देश, विश्व में काफी पीछे है। इसका मुख्य कारण गुणवत्तायुक्त चारे की कमी है।

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प्रकाशित

2024-04-03