हिमालयी क्षेत्रों में लाल धान

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लेखक

  • जे.पी. आदित्य भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
  • अनुराधा भारतीय भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
  • जगदीश कुमार आर्या भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
  • निर्मल हेडाऊ भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
  • लक्ष्मी कान्त भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)

सार

सपेफद चावल सामान्यतः विश्वभर में एक मुख्य आहार के रूप में प्रयोग किया जाता है। इससे अलग दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देश लाल, काले, बैंगनी और भूरे चावल की किस्मों का भी उपभोग करते हैं। भारत और इंडोनेशिया में किसी भी अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की तुलना में पिग्मेंटेड चावल/धान की खेती का क्षेत्रा अधिक है। उनके पिग्मेंटेड चावल की खेती का प्रतिशत सपेफद चावल की खेती की तुलना में कम है। पिग्मेंटेड चावल/धान की खेती में लाल चावल/धान भारतीय बाजार में कापफी प्रचलित है। यह उपभोक्ताओं द्वारा अधिक पसंद किया जाता है और किसानों के खेतों में व्यापक रूप से बोया जाता है। लाल धान/चावल का विभिन्न तरीके से उपयोग किया जाता है जैसे कि उपभोक्ता और बाजार के दृष्टिकोण से, ‘लाल धान/चावल’ आमतौर पर एक लाल ब्राॅन परत वाले चावल के रूप में परिभाषित किया जाता है। खेतों में किसान तीन विभिन्न स्थितियों में ‘लाल धान’ शब्द का प्रयोग करते हैंः पहला वह धान की किस्म, जिसका छिलका लाल हो, लेकिन ब्राॅन परत सपेफद हो। दूसरा ऐसी धान की किस्म, जिसका छिलका पीले रंग का हो, लेकिन ब्राॅन परत लाल हो और तीसरी वह जिसमें भूसी/छिलके तथा ब्राॅन परत दोनों लाल हों।

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प्रकाशित

2024-04-03