[1]
सी. तारा सत्यवती व महेश कुमार, “खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में बढ़ता श्री अन्न का महत्व”, खेती, vol. 78, no. 8, पृ. 25–27, मार्च 2026, अंतिम उपयोग: अक्ट. 20, 2026. पर उपलब्ध: https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1683