About the Journal
भाकृअनुप की इस लोकप्रिय हिंदी मासिक पत्रिका का प्रकाशन 1948 में शुरू किया गया था और तब से यह नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है। इसमें आईसीएआर अनुसंधान नेटवर्क में काम कर रहे प्रख्यात वैज्ञानिकों के लेख शामिल किए जाते हैं। इसमें समन्वित कृषि, मात्स्यिकी, कृषि वानिकी, मधुमक्खीपालन, फसलें, पशुपालन, फसल प्रणाली, व्यावसायिक खेती, फसल स्वास्थ्य, नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों, कृषि इंजीनियरिंग, मृदा सुधार आदि पर आधारित लेख प्रकाशित किये जाते हैं। ‘अगले माह खेतों में‘ शीर्षक से एक नियमित कॉलम प्रकाशित किया जा रहा है जो किसानेां के लिए आगामी कृषि गतिविधियों के बारे में आवश्यक जानकारी प्रदान करता है। ‘कृषि खबरें, देश-विदेश की नामक कॉलम कृषि में उपलब्धियों से संबंधित नवीनतम समाचारों पर आधारित है। इसी प्रकार ‘सामयिक‘ नामक एक अन्य स्तंभ है जिसमें कृषि के ज्वलंत विषयों से संबंधित संक्षिप्त जानकारी प्रदान की जाती है। प्रत्येक अंक में औसतन मुद्रित 80 पूर्ण रंगीन पृष्ठ होते हैं। कृषक समुदाय, विस्तार कार्यकर्ताओं, प्रगतिशील किसानों और कृषि छात्रों के लिए उपयोगी विषयों पर आधारित ज्ञानवर्धक जानकारियां इसमें प्रकाशित की जाती है। वर्ष में 3 से 4 विशिष्ट विषयों पर आधारित विशेषांक प्रकाशित किए जा रहे हैं।
Current Issue
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) के 98वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में प्रकाशित ‘खेती’ पत्रिका का यह विशेषांक ‘आजीविका उद्यमिता’ विषय पर केंद्रित है। इस विशेषांक का उद्देश्य कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे आय, रोजगार और उद्यमिता का सशक्त माध्यम के रूप में प्रस्तुत करना है। इसमें कृषि आधारित विविध सफल उद्यमों एवं नवीन तकनीकों को सरल भाषा में संकलित किया गया है, ताकि किसान, ग्रामीण युवा, महिलाएँ, स्टार्ट-अप उद्यमी तथा कृषि से जुड़े अन्य हितधारक इनसे प्रेरणा लेकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें।
विशेषांक में उन्नति, मशरूम उत्पादन, सब्जी उत्पादन, बागवानी, उद्यानिकी, मत्स्यपालन तथा कृषि यंत्रीकरण जैसे विविध कृषि उद्यमों से संबंधित व्यावहारिक अनुभव, वैज्ञानिक तकनीकें एवं सफलता मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं। साथ ही, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, आधुनिक उत्पादन प्रणालियों तथा बाजारोन्मुख कृषि की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया है।
यह विशेषांक किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बहुआयामी कृषि उद्यम अपनाने, जोखिम कम करने, आय के नए स्रोत विकसित करने तथा कृषि को लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय के रूप में स्थापित करने के लिए उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह अंक वैज्ञानिक अनुसंधान और खेत स्तर की सफलता के बीच प्रभावी सेतु का कार्य करते हुए "विकसित कृषि, समृद्ध किसान" के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।