स्ट्राॅबेरी की उन्नत खेती
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स्ट्राॅबेरी (फ्रैगरिया × अनन्नासा) आर्थिक और पौष्टिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण फल है। यह रोजेसी कुल का पौध है। इसकी उत्पत्ति 1750 के दशक में फ्रास में पूर्वी उत्तरी अमेरिका से लाए गए फ्रैगरिया वर्जिनियाना और फ्रैगरिया चिलोएन्सिस के क्राॅस से हुई। इसे वर्ष 1714 में एमेडी-फ्राकोइस फ्रेजियर द्वारा चिली से लाया गया था। फ्रैगरिया × अनन्नासा की किस्मों ने, व्यावसायिक उत्पादन में, वुडलैंड स्ट्राॅबेरी (फ्रैगरिया वेस्का) का स्थान ले लिया है। यह 17वीं शताब्दी की शुरूआत में खेती की जाने वाली पहली स्ट्राॅबेरी प्रजाति थी। मूल रूप से, स्ट्राॅबेरी की खेती की जाने वाली किस्म दो अलग-अलग किस्मों यानी पश्चिमी अमेरिका की फ्रैगरिया चिलोएन्सिस और पूर्वी अमेरिका की फ्रैगरिया वर्जिनियाना के मिश्रण से बनी है। यह समशीतोष्ण क्षेत्रों का मूल पौध है। यह पफल पहले फ्रास में जंगली रूप से उगाया जाता था पर अब वर्तमान समय मे इसकी खेती पूरे यूरोप, संयुत्तफ राज्य अमेरिका और कनाडा में व्यापक रूप से की जाती है। भारत में, नैनीताल, देहरादून, महाबलेश्वर, कश्मीर घाटी, कलिम्पोंग और बेंगलुरु में स्ट्राॅबेरी की खेती की जाती है। इसके फल अपनी सुगंध् और स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं। स्ट्राॅबेरी का विभिन्न प्रकार के उत्पादों जैसे पेय पदार्थ, मिठाइयाँ, इत्रा और सौंदर्य प्रसाध्नों के उत्पादन में भीे उपयोग किया जाता है।
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