पपीते का जैवसघन एकीकृत कीट प्रबंधन

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लेखक

  • स्वाति साहा भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधन संस्थान, क्षेत्राीय केंद्र, पुणे सर्वे सं. 125ए, बाणेरफाटा, आईटीआई रोड, औंध्, पुणे 411007
  • के चन्द्रशेकर भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधन संस्थान, क्षेत्राीय केंद्र, पुणे सर्वे सं. 125ए, बाणेरफाटा, आईटीआई रोड, औंध्, पुणे 411007
  • सुजान सिंह कुशवाह भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधन संस्थान, क्षेत्राीय केंद्र, पुणे सर्वे सं. 125ए, बाणेरफाटा, आईटीआई रोड, औंध्, पुणे 411007

सार

पपीता (कैरिका पपाया) एक उष्ण कटिबंधीय पफल है। इसका उच्च पोषण और औषधीय मूल्य के साथ व्यावसायिक महत्व भी है। इस फसल पर कीटों के प्रकोप से किसानों का बहुत आर्थिक नुकसान होता है। रोगों और कीटों के प्रबंध्न के लिये प्रतिरोधी किस्मों की खेती एक अच्छा विकल्प है। अध्किांश किस्में कई रोगों और कीटों के प्रति संवेदनशील होती हैं। अतः उपरोत्त समस्या को दूर करने के लिये पपीते का जैव सघन एकीकृत कीट प्रबंध्न उपयोगी है।

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प्रकाशित

2024-06-21