मार्च-अप्रैल माह के मुख्य बागवानी कार्य

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लेखक

  • हरे कृष्ण भाकृअप-भारतीय सब्जी अनुसंधन संस्थान, वाराणसी-221005
  • अरविंद कुमार सिंह केंद्रीय बागवानी परीक्षण केंद्र, (केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान), वेजलपुर (गोध्रा), गुजरात-389340
  • नृपेन्द्र विक्रम सिंह भाकृअप-राष्ट्रीय अनार अनुसंधन केंद्र, एनएच-65, सोलापुर- पुणे राष्ट्रीय राजमार्ग, केगांव, सोलापुर (महाराष्ट्र) -413255
  • शुभम कुमार तिवारी भाकृअप-भारतीय सब्जी अनुसंधन संस्थान, वाराणसी-221005
  • मनोज कुमार सिंह भाकृअप-भारतीय सब्जी अनुसंधन संस्थान, वाराणसी-221005

सार

मार्च-अप्रैल की द्विमाही के दौरान जहां सदाबहार पफलों जैसे आम, अमरूद, लीची, नीबूवर्गीय पफल आदि के नए बाग लगाए जा सकते हैं वहीं शीतोष्णवर्गीय पफलों तथा कई समशीतोष्ण व उपोष्ण पफलों में पुष्पण आरंभ हो जाता है। अतः इस द्विमाही के दौरान जहां बागवानों को पुष्पण के दौरान परागण प्रबंध्न करना है वहीं अत्यध्कि सिंचाई से भी बचना है। इसके अतिरित्तफ फल लगने के बाद आवश्यक सिंचाई का समुचित प्रबंध् भी करना है। तो आइये फलन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण ऋतुराज वसंत का स्वागत बागों में किए जाने वाली कृषि क्रियाओं द्वारा कैसे किया जाए, इस विषय पर चर्चा प्रारम्भ करते हैं।

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प्रकाशित

2024-06-21