हस्त परागण बढ़ाए शरीफे की उपज

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लेखक

  • निर्मल कुमार मीना फल विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालावाड़, राजस्थान
  • लघुराम फल विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालावाड़, राजस्थान
  • सुमन चौधरी फल विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालावाड़, राजस्थान
  • भगवती फल विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालावाड़, राजस्थान
  • रूपा फल विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालावाड़, राजस्थान

सार

शरीपफा इक्कीसवीं शताब्दी के फ्सुपर पफलय् के रूप में जाना जाता है। यह औषधि एवं पोषक गुणों से भरपूर स्वादिष्ट एवं अच्छी आय देने वाला पफल है। प्राकृतिक परागण द्वारा इसमे संतोषजनक उपज प्राप्त नहीं होती है। पुमंग एवं जायांग के परिपक्व काल में भिन्नता एक प्रमुख बाधा है। हस्त परागण उपज एवं गुणवत्ता बढ़ाने की बहुत सरल एवं प्रभावी तकनीक है। इससे न केवल उपज बल्कि पफल के जैव रासायनिक गुणों एवं निधनी आयु में भी वृद्धि होती है। उत्तरी भारत में जुलाई के माह अर्का सहन किस्म में प्रातः छह बजे से नौ बजे तक बालानगर या रायदुर्ग किस्म के परागकणों द्वारा पेंटब्रश की सहायता से हस्त परागण करने पर प्राकृतिक परागण की तुलना में छह से आठ गुना तक उपज में वृद्धि देखी जा सकती है।

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प्रकाशित

2022-11-16