गुग्गल की उन्नत खेती

109 / 133

लेखक

  • देवी लाल धकड़ पादप रोग विज्ञान विभाग, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर, जयपुर, राजस्थान
  • शिवम मौर्य पादप रोग विज्ञान विभाग, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर, जयपुर, राजस्थान
  • रायपाटिकार्तिक पादप रोग विज्ञान विभाग, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर, जयपुर, राजस्थान
  • कुलदीप सिंह पादप रोग विज्ञान विभाग, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर, जयपुर, राजस्थान
  • आदित्य चौधरी पादप रोग विज्ञान विभाग, श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर, जयपुर, राजस्थान

सार

औषधिया एवं सुगंधीय पौधे मानव सभ्यता से जुड़े रहे हैं और भविष्य के लिए मूल्यवान ध्रोहर हैं। अनेक कारणों से इन पौधें को वर्तमान में उपयोग करते हुए भविष्य के लिए सुरक्षित रऽना भी अत्यंत आवश्यक है। भारत के रेड डाटा बुक में 427 संकटग्रस्त पौधों के नाम दर्ज हैं। समय रहते इन औषध्ीय महत्व का संरक्षण करना जरूरी है अन्यथा भविष्य में इनका अस्तिव भी समाप्त हो सकता है। इतना ही नहीं इस कारणवश आने वाले समय में इनका लाभ नहीं मिल सकेगा। ऐसे ही एक पौधे गुग्गल के बारे में यहां संरक्षित जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2022-11-16