स्वास्थ्य एवं समृद्धि के लिए दैवीय फल -आँवला

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लेखक

  • देवेन्द्र पाण्डेय पी के शुक्ला, संजय कुमार सिंह, देवानंद गिरी एवं शिव पूजन ९४१५५१६५५७
  • शारदुल्य शुक्ला केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, काकोरी,लखनऊ-226101 https://orcid.org/0000-0002-5766-6503 ##orcid.unauthenticated##
  • शिव पूजन केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, काकोरी,लखनऊ-226101
  • संजय कुमार सिंह केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, काकोरी,लखनऊ-226101
  • आश्चर्य पाण्डेय केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, काकोरी,लखनऊ-226101

सार

आँवला (Emblica officinalis Gaertn) यूूफोरबिएसी परिवार का एक महत्वपूर्ण देशज फल है। भारत के विभिन्न क्षेत्रो मे इसे विभिन्न नामों यथा - हिंदी मे 'आँवला', संस्कृत मे 'धात्री', या 'अमलकी', बंगाली या उड़िया मे 'आमला' या 'अमलकी' तमिल या मलयालम मे 'नेल्ली', गुजराती मे 'आवला-आमला', गुरुमुखी मे 'अमोल फल', अरबी मे 'आमलन', मराठी मे 'आवलकाठी', अंग्रेजी मे 'इंडियन गूजबेरी' के नाम से जाना जाता है। अपने अद्वितीय औषधीय एवं पोषक गुणो के कारण भारतीय पौराणिक साहित्य जैसे वेद, स्कंदपुराण, शिवपुराण, पद्मपुराण, रामायण, कादंबरी, चरकसंहिता, सुश्रुतसंहिता मे इसका वर्णन है । महर्षि चरक ने इसको जीवनदात्री अथवा अमृतफल के समान लाभकारी माना है अतः इसे अमृत फल या कल्पवृक्ष के नाम से जाना जाता है। अपने विशिष्ट गुणो यथा प्रति इकाई उच्च उत्पादकता, विभिन्न प्रकार की जलवायु एवं भूमि हेतु उपयुक्तता, पोषक एवं औषधीय गुणों से परिपूर्णता एवं विभिन्न रूपों में ;खाद्य, प्रसाधन, आयुर्वैदिकद्ध उपयोग के कारण आंवले की लोेकप्रियता भारत में काफी तेजी से बढ़ रही है। 

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प्रकाशित

2026-03-30

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