टमाटर के मूल्यसंवर्धन द्वारा रोज़गार के नए आयाम
12 / 25##semicolon##
मूल्यसंवर्धन, प्रसंस्करण, रोज़गारसार
टमाटर एक प्रमुख सब्ज़ी फ़सल है, जिसका उत्पादन औद्योगिक स्तर पर व्यापक रूप से किया जाता है। भारत के अधिकांश क्षेत्रों में टमाटर दो मुख्य मौसम खरीफ (अगस्त–अक्टूबर) और शीत/रबी (दिसंबर–अप्रैल) में उगाए और संसाधित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, टमाटर की खेती ऑफ-सीज़न (मई–जुलाई) में भी संरक्षित कृषि तकनीकों के माध्यम से सफलतापूर्वक की जाती है। वजन के आधार पर वैश्विक स्तर पर बागवानी सब्ज़ियों के उत्पादन में टमाटर, आलू के बाद दूसरे स्थान पर आता है। ताजा टमाटरों का उपयोग अनेक तरीकों से किया जाता है- इन्हें सलाद के रूप में खाया जाता है, साथ ही विभिन्न व्यंजनों, खाद्य तथा पेय उत्पादों में इनके अर्क, सॉस या गाढ़े गूदे का प्रयोग किया जाता है। टमाटर का मूल्यसंवर्धन किसानों के लिए नए अवसर के द्वार खोलता है और उत्पादनशीलता को स्थायी आय में बदलने का सशक्त माध्यम बनता है। सरल प्रसंस्करण तकनीकों द्वारा टमाटर को विविध उत्पादों में रूपांतरित कर ग्रामीण स्तर पर रोजगार, उद्यमिता और कुटीर उद्योगों को महत्वपूर्ण बढ़ावा दिया जा सकता है।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-nd4.footer##फल फूल में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।