अलसी के बहुआयामी मूल्यवर्धित उत्पाद

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लेखक

  • Dr Anjali Verma ANDUAT, AYODHYA, UP

सार

अलसी, जिसे फ्लैक्ससीड तथा साधारण बोलचाल की भाषा में तिसी भी कहा जाता है, सदियों से मानव आहार का अभिन्न हिस्सा रही है। यह एक सुपर फूड है, जो न केवल पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि औषधीय, औद्योगिक एवं पर्यावरण-अनुकूल उपयोगों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। परंपरागत रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अलसी का उपयोग घरों में हलवा, लड्डू, चटनी और तेल के रूप में किया जाता रहा है, जो सर्दी से बचाव तथा शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में सहायक माना जाता है। अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, लिग्नन, फाइबर तथा प्रोटीन जैसे जैव-सक्रिय यौगिक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व न केवल हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, सूजन को नियंत्रित करते हैं और पाचन तंत्र को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि खाद्य उद्योग, पशु पोषण, सौंदर्य प्रसाधन तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के क्षेत्र में भी नई संभावनाएँ उत्पन्न कर रहे हैं। हालाँकि, यह विडंबना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ अलसी का उत्पादन पर्याप्त मात्रा में होता है, वहाँ इसके पोषण एवं औषधीय लाभों के प्रति जागरूकता का अभाव है। इसी कारण इसका उपयोग सीमित दायरे तक ही सिमट कर रह जाता है।

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    Scientist, KRISHI VIGYAN KENDRA, BAST

    ANDUAT, AYODHYA, UP

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प्रकाशित

2026-03-30