कीटरोधी नेट हाउस में लिलियम की संरक्षित खेती: पादप वृद्धि नियामकों के विवेकपूर्ण उपयोग से गुणवत्ता एवं स्थिर उत्पादन
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भारतीय उद्यानिकी में सजावटी पुष्प फसलों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। बदलती जीवन-शैली, शहरीकरण तथा पुष्प उद्योग के विस्तार के कारण उच्च गुणवत्ता वाले कट-फूलों की माँग तेजी से बढ़ी है। आज कृषि में फल एवं सब्जी फसलों का प्रभुत्व है, परंतु कृषि जैव विविधता के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए लिलियम जैसी सजावटी पुष्प फसलों की खेती एक महत्वपूर्ण और समयोचित विकल्प के रूप में उभर रही है। इस संदर्भ में लिलियम (Lilium) एक प्रमुख सजावटी पुष्प फसल के रूप में उभरकर सामने आई है। इसके आकर्षक रंग, लंबी एवं सुदृढ़ स्पाइक तथा अधिक बाजार मूल्य के कारण यह किसानों, पुष्प उत्पादकों और उद्यमियों के लिए एक लाभकारी विकल्प बनती जा रही है।
साथ ही, वर्तमान समय में सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल एवं जैव विविधता आधारित खेती प्रणालियों की आवश्यकता भी बढ़ गई है। कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य तथा लाभकारी जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में संरक्षित खेती, विशेषकर कीटरोधी नेट हाउस, एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आती है।
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