ग्रीष्म ऋतु में गेंदा फूल की खेतीः कम लागत में अच्छी आमदनी
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गेंदा भारत के पुष्प व्यवसाय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि गेंदा का उपयोग देश में धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवसरों पर बड़े पैमाने पर किया जाता है। पूजा-अर्चना के अतिरिक्त विवाह, जन्मदिन, सरकारी एवं निजी संस्थानों द्वारा आयोजित विभिन्न समारोहों, उत्सवों तथा सामाजिक आयोजनों में गेंदा पुष्प का व्यापक प्रयोग किया जाता है। पंडाल, मंडप, द्वार, वाहनों की सजावट के साथ-साथ अतिथियों के स्वागत हेतु मालाओं, गुलदस्तों एवं पुष्प सज्जा में गेंदा फूल की विशेष मांग रहती है। इसकी निरंतर और व्यापक उपयोगिता के कारण बाजार में इसकी मांग वर्ष भर बनी रहती है, जिससे यह एक व्यावसायिक रूप से लाभकारी पुष्प फसल के रूप में उभरता है।वर्तमान समय में गेंदा पुष्प का उपयोग केवल सजावटी एवं धार्मिक उद्देश्यों तक सीमित न रहकर पोल्ट्री उद्योग में भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। मुर्गियों के आहार में गेंदा पुष्प के उपयोग से अंडे की जर्दी का रंग आकर्षक पीला हो जाता है, जिससे अंडों की गुणवत्ता एवं बाजार मूल्य में वृद्धि होती है। इस प्रकार गेंदा पुष्प का व्यावसायिक महत्व बहुआयामी हो गया है, जो किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।वर्तमान परिदृश्य में परंपरागत कृषि प्रणाली पर जलवायु परिवर्तन, विपणन समस्याओं तथा बढ़ती उत्पादन लागत का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिसके कारण किसानों की आय में निरंतर गिरावट देखी जा रही है। ऐसी स्थिति में किसानों को वैकल्पिक एवं लाभकारी खेती की ओर प्रेरित करना आवश्यक हो गया है। गेंदा पुष्प की खेती इस दिशा में एक उपयुक्त विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है, जिसमें कम समय में अधिक उत्पादन एवं बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।विशेष रूप से ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु के दौरान, जब अन्य फसलों पर अत्यधिक तापमान एवं भारी वर्षा का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, उस अवधि में अप्रैल से सितंबर माह के बीच गेंदा की सिराकोल प्रजातियों का चयन कर किसान अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। श्रावण मास, विवाह-समारोहों तथा विभिन्न सामाजिक आयोजनों के समय गेंदा पुष्प की मांग में तीव्र वृद्धि होती है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होता है।इसके बावजूद तकनीकी जानकारी के अभाव में अनेक किसान गेंदा की खेती अपनाने के बजाय पारंपरिक सब्जी फसलों जैसे गोभी आदि का उत्पादन करते हैं, जिनमें अधिक वर्षा के कारण पौधों के सड़ने से उत्पादन एवं लाभ दोनों प्रभावित होते हैं। जबकि अध्ययनों से यह स्पष्ट होता है कि गेंदा पुष्प की खेती ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु में एक पारंपरिक कृषि से अलग, कम जोखिम वाली एवं अधिक लाभकारी फसल है, जो किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाकर उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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