टिकाऊ कृषि की आधारशिला हैं महिला कृषक
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कृषक महिलाएँ##common.commaListSeparator## जैव विविधता##common.commaListSeparator## कृषि पारिस्थितिकी##common.commaListSeparator## पोषणसार
यह लेख बिहार की ग्रामीण महिलाओं की उस अदृश्य लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया गया है, जो वे कृषि जैव विविधता के संरक्षण और कृषि-पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने में निभाती हैं। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार कृषक महिलाएँ परंपरागत बीजों का संरक्षण, फसल विविधीकरण, मिश्रित खेती, जैविक खादों का उपयोग, जल-मृदा संरक्षण तथा स्थानीय ज्ञान प्रणालियों के माध्यम से टिकाऊ कृषि को मजबूती प्रदान करती हैं। लेख यह भी रेखांकित करता है कि ये महिलाएँ केवल श्रमिक नहीं, बल्कि ज्ञान-संरक्षक, नवाचारक और पारिस्थितिकीय संरक्षक के रूप में कार्य कर रही हैं। इस प्रकार, बिहार की कृषक महिलाएँ न केवल खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की आधारशिला हैं, बल्कि सतत कृषि विकास और ग्रामीण समाज की स्थिरता की मौन प्रहरी भी हैं।
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