छत पर जैविक किचन गार्डन

12 / 18

लेखक

  • आर. के. सिंह सब्जी विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, रानी लक्ष्मीर्बाइ केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी
  • आकांक्षा सिंह सब्जी विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, रानी लक्ष्मीर्बाइ केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी
  • निधि प्रिया सब्जी विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, रानी लक्ष्मीर्बाइ केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी
  • बृज बिहारी शर्मा सब्जी विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, रानी लक्ष्मीर्बाइ केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी
  • अर्जुन लाल ओला सब्जी विज्ञान विभाग, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, रानी लक्ष्मीर्बाइ केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी

सार

रूपफटाॅप गार्डनिंग, जिसे टेरेस गार्डनिंग भी कहा जाता है, एक आधुनिक शहरी कृषि प(ति है, जिसमें घरों की छतों पर विभिन्न प्रकार के पौधे उगाए जाते हैं। यह पद्धति विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है, जहाँ कृषि योग्य भूमि की कमी एक बड़ी चुनौती है। टेरेस गार्डनिंग न केवल हरित वातावरण के निर्माण में सहायक है, बल्कि यह वायुमंडलीय तापमान को कम करने, वायु गुणवत्ता में सुधर करने तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखनेमें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रूपफटाॅप गार्डनिंग के माध्यम से घरेलू स्तर
पर ताजे पफल, सब्जियाँ, फूल एवं औषधीय पौधे उगाए जा सकते हैं, जिससे पौष्टिक एवं सुरक्षित आहार की उपलब्ध्ता सुनिश्चित होती है। इसके साथ ही यह शहरी जीवन में प्राकृतिक सौंदर्य और हरियाली जोड़ती है, जिससे शहरों की दृश्यात्मक सुंदरता में वृद्धि होती है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2026-10-08