किन्नू फसल में कीट एवं रोगों का निदान

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लेखक

  • गजेन्द्र सिंह विषय वस्तु विशेषज्ञ (पादप सुरक्षा), कृषि विज्ञान केन्द्र, अमिहित, जौनपुर, उत्तर प्रदेश
  • शिवम कुमार राजपूत पीएच.डी शोध छात्रा (फल विज्ञान), भाकृअनुप-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु, कर्नाटक

सार

भारत में विभिन्न प्रकार के फलों का उत्पादन किया जाता है तथा फल उत्पादन के क्षेत्रा में देश का विश्व में प्रमुख स्थान है। किन्नू, नीबू कुल की एक प्रमुख फल फसल है, जिसका उत्पादन देश में बड़े पैमाने पर किया जाता है। किन्नू की खेती भारत के अनेक राज्यों में होती है, जिनमें हरियाणा का विशेष स्थान है। वहीं किन्नू उत्पादन के दौरान अनेक प्रकार के कीट फसल को प्रभावित करते हैं, जिनके प्रभावी प्रबंधन हेतु समेकित नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) एक महत्वपूर्ण तकनीक है। आईपीएम तकनीक का प्रमुख उद्देश्य फसल क्षति को न्यूनतम करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि पर्यावरण पर प्रदूषण का प्रभाव कम से कम हो। यह प्रबंधन प्रणाली कृषि में स्थिरता बनाए रखने, रसायनों के कारण खाद्य शृंखला पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की आशंका को कम करने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उत्पाद की गुणवत्ता और मात्रा बनाए रखने में सहायक है। हाल के वर्षों में परिवर्तित फसल
पद्धतियों, कृषि क्रियाओं, अतिसंवेदनशील किस्मों के उपयोग एवं जलवायु परिवर्तन के कारण कई पफसलों में कीट एवं रोगों की स्थिति में बदलाव देखने को मिला है। आईपीएम
का एक अन्य उद्देश्य यह भी है कि कीटों एवं रोगों में कीटनाशकों तथा फपफूंदनाशकों से प्रतिरोध्क क्षमता विकसित न होने पाए।

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प्रकाशित

2026-10-08