सेब में डीमेटोफोरा जड़ सड़न का प्रबंधन

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लेखक

  • दीपिका शर्मा डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन (हिमाचल प्रदेश)
  • सतीश कुमार शर्मा डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन (हिमाचल प्रदेश)
  • शालिनी वर्मा डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन (हिमाचल प्रदेश)

सार

डीमेटोफोरा नेकट्रिक्स द्वारा होने वाली सेब का जड़ सड़न जिसे सामान्यतः श्वेत जड़ सड़न कहा जाता है, यह सेब बागानों का एक अत्यंत विनाशकारी मृदाजनित रोग है। यह युवा
तथा परिपक्व दोनों प्रकार के वृक्षों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यह रोगजनक मृदा में वर्षों तक जीवित रहने की क्षमता रखता है और संक्रमण के उपरांत पौधें में लगातार
पतन, बढ़वार में रुकावट तथा कई बार अचानक पौधे की मृत्यु तक का कारण बनता है। भारत में यह रोग विशेष रूप से निचले एवं मध्य पर्वतीय सेब उत्पादक क्षेत्रों में तेजी
से फैल रहा है, जहाँ अत्यधिक मृदा में नमी, पुराने बगीचे और असंतोषजनक स्वच्छता प्रबंध्न इसके प्रसार को और बढ़ावा देते हैं। प्रभावित क्षेत्रों में इससे होने वाला नुकसान
20 से 80 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है। भारत में इस रोग की पहली पुष्टि उत्तरांचल की पहाड़ियों से की गई थी। इस प्रकार समय पर रोग की पहचान और समन्वित प्रबंधन
रणनीतियाँ अपनाना सेब बागानों की उत्पादकता और दीर्घायु के लिए अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, आगे प्रस्तुत विवरण डी. नेकट्रिक्स
द्वारा उत्पन्न श्वेत जड़ सड़न के जैविक व्यवहार और इसके प्रबंधन उपायों पर केंद्रित है।

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प्रकाशित

2026-10-08