कटहल की उन्नत किस्मों-सिद्दू और शंकरा से बढ़ती समृद्धि
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भारत विश्व में कटहल उत्पादन के प्रमुख देशों में से एक है। हमारे देश में कटहल केवल एक फल नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, पोषण और आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में यह सदियों से घरेलू बगीचों और खेतों की मेड़ पर उगाया जाता रहा है। लेकिन लंबे समय तक कटहल को एक “उपेक्षित फल” माना गया। वैज्ञानिक अनुसंधान, संगठित विपणन और उन्नत पौध सामग्री की कमी के कारण इसकी व्यावसायिक क्षमता पूरी तरह सामने नहीं आ पाई।
इसी बीच कर्नाटक के किसानों के खेतों से सामने आई दो अनूठी कटहल किस्मों “सिद्दू” और “शंकरा”ने कटहल की दुनिया में नई क्रांति ला दी। तांबे-लाल रंग के आकर्षक कोये, बेहतर स्वाद, उच्च पोषण गुणवत्ता और किसानों को मिलने वाली अधिक आय ने इन किस्मों को देशभर में लोकप्रिय बना दिया। इनकी कहानी केवल दो किस्मों की सफलता नहीं, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार स्थानीय जैव विविधता को वैज्ञानिक सहयोग और किसान भागीदारी के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाई जा सकती है।
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