गौण बागवानी फसलों के मूल्यवर्धित उत्पाद

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लेखक

  • संजय कुमार सिंह बागवानी विज्ञान विभाग, भाकृअनुप परिषद, कृषि अनुसंधान भवन-2, पूसा, नई दिल्ली
  • पी. सी. त्रिपाठी बागवानी विज्ञान विभाग, भाकृअनुप परिषद, कृषि अनुसंधान भवन-2, पूसा, नई दिल्ली
  • वी. बी. पटेल बागवानी विज्ञान विभाग, भाकृअनुप परिषद, कृषि अनुसंधान भवन-2, पूसा, नई दिल्ली
  • अंजनी कुमार झा कृज्ञाप्रनि-भाकृअनुप, कृषि अनुसंधान भवन-1, पूसा, नई दिल्ली
  • आर. बी. तिवारी भाकृअनुप-आईआईएचआर, हेसरघट्टा, बेंगलुरु
  • करुणाकरण जी. भाकृअनुप-आईआईएचआर, हेसरघट्टा, बेंगलुरु

सार

गौण बागवानी फसलें पोषण और स्वास्थ्यवर्धक तत्वों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती खाद्य और पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधन में इन्हें आहार में शामिल करना एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। ये फसलें एस्काॅर्बिक एसिड, खनिज तत्व, फ्लेवोनोइड्स, कैरोटीनाॅइड्स तथा अन्य फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती हैं। फाइटोकेमिकल्स जैविक रूप से सक्रिय यौगिक हैं, जिनमें स्वास्थ्य संरक्षक गुण पाए जाते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट, सूजनरोधी, उत्परिवर्तन रोधी, कैंसररोधी  और बुढ़ापारोधी  गतिविधियां शामिल हैं। इसी कारण आंवला, जामुन, अनार, कोकम और करेला जैसी अनेक फसलों का उपयोग विभिन्न रोगों की रोकथाम में हर्बल स्रोत के रूप में भी किया जाता है। आज बदलती जीवनशैली, पोषण असंतुलन और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के बीच ऐसे खाद्य स्रोतों की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जो पोषक होने के साथ स्वास्थ्यवर्धक भी हों। इस दिशा में गौण बागवानी पफसलें एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही हैं। इन फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धित उत्पादों के माध्यम से पोषण सुरक्षा, स्वास्थ्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा दी जा सकती है।

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प्रकाशित

2026-07-16